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'यह तो लूट है' कैंसर की दवाओं की कीमत 10 गुना बढ़ाने पर सुप्रीम कोर्ट नाराज, निजी अस्पतालों की मनमानी पर उठाए सवाल

 Written By: Bharti Singh
 Published : Sep 30, 2026 07:54 am IST,  Updated : Sep 30, 2026 08:20 am IST

प्राइवेट अस्पतालों में कैंसर की दवाओं की कीमतों को लेकर की जा रही मनमानी पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए, केन्द्र सरकार से 2 हफ्ते में जवाब मांगा है। कोर्ट ने सभी दवाओं पर 16 प्रतिशत तक एक समान मार्जिन रखने के मुद्दे पर भी केंद्र सरकार से विचार करने के लिए कहा है।

कैंसर की कीमतों पर सुप्रीम कोर्ट- India TV Hindi
कैंसर की कीमतों पर सुप्रीम कोर्ट Image Source : INDIA TV

कैंसर की दवाओं पर अस्पतालों की मनमानी और कई गुना ज्यादा कीमत वसूलने के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा कि अगर कोई कैंसर की दवा कंपनी रिटेलर को 2,700 रुपये में देती है और अस्पताल या दूसरी जगह वही दवा 27,000 रुपये की मिलती है, तो यह बहुत गंभीर मामला है। कोर्ट ने सभी दवाओं पर 16 प्रतिशत तक एक समान मार्जिन रखने के मुद्दे पर भी केंद्र सरकार से विचार करने के लिए कहा है। 

कैंसर की दवाओं की कीमत को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त 

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ दवाओं की कीमत, जेनेरिक दवाओं की बिक्री और मेडिकल डिवाइस की कीमतों से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रही थी। यह मामला DPCO 2013 से भी जुड़ा है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि आखिर दवाओं की कीमत में इतना बड़ा अंतर क्यों है? कोर्ट ने उदाहरण देते हुए कहा कि एक जरूरी कैंसर की दवा का MRP 27,000 रुपये है, जबकि वही दवा रिटेलर को सिर्फ 2,700 रुपये में दी जाती है। कोर्ट ने पूछा कि कीमत में इतना बड़ा अंतर किसके फायदे के लिए है और इसका फायदा किसे मिल रहा है।

प्राइवेट अस्पतालों की मनमानी पर उठाए सवाल 

कोर्ट ने केंद्र सरकार से यह भी कहा कि वह इस बात की जांच करे कि कई बड़े निजी अस्पताल मरीजों को अपनी ही फार्मेसी या किसी खास केमिस्ट से दवा खरीदने के लिए क्यों कहते हैं। कोर्ट ने सवाल उठाया कि अगर मरीज बाहर से दवा खरीदता है तो कुछ अस्पताल इलाज की गारंटी या सुविधा देने से इनकार क्यों करते हैं। कॉर्पोरेट अस्पताल किसी को नहीं बख्शते। वो तो शव तक को बाहर नहीं ले जाने देते। फार्मा सेक्टर को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।

दवाओं की कीमत तय करने का एक समान नियम क्यों नहीं

पीठ ने कहा कि अगर मरीज का इलाज सरकारी योजना के तहत हो रहा है तो दवा और इलाज का खर्च आखिरकार टैक्सपेयर्स के पैसे से ही आता है। ऐसे में दवाओं की कीमत तय करने के लिए एक समान नियम क्यों नहीं होना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर कोई केमिस्ट जरूरतमंद मरीज को दवा कम कीमत पर देने की कोशिश करता है, तो मरीज को उल्टा यह शक हो सकता है कि कहीं दवा नकली तो नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने 2 सप्ताह में सरकार से मांगा जवाब

केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वह अधिकारियों के साथ इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे और इसका कोई बैलेंस समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी। उन्होंने इसके लिए दो सप्ताह का समय मांगा। 

कैंसर दवाओं की ज्यादा कीमत वसूले जाने पर कड़ी चिंता

कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को तय की है। इससे पहले 22 सितंबर को भी सुप्रीम कोर्ट ने जरूरी कैंसर दवाओं की ज्यादा कीमत वसूले जाने पर कड़ी चिंता जताई थी। मामले में दवाओं की कीमत नियंत्रित करने और मरीजों से कथित तौर पर ज्यादा कीमत वसूले जाने को रोकने की मांग की गई है।

Input: PTI

 

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